होली पर समझदारी दिखाई इस बार सहारनपुर वासियों ने

विष्णु मंदिर, माधव नगर पर होलिका दहन

सहारनपुर – 26 मार्च ।  होलिका दहन के नाम पर हर मुहल्ले में हज़ारों कुंतल बेशकीमती लकड़ी को प्रति वर्ष स्वाहा कर दिया जाना हर समझदार व्यक्ति को विचलित करने के लिये पर्याप्त है।   और यदि इतना काफी न हो, तो अगले ही दिन, एक ऐसे शहर में जिसमें भूजल का स्तर खतरनाक ढंग से नीचे, और नीचे जा रहा हो, हज़ारों लाखों गैलन पानी को सड़कों पर यूं ही बहा देना भयावह है !

HOLI_13_03हमारा समाज उत्सवधर्मी समाज है।  हम लोग महंगाई से,  भ्रष्टाचार की शिकार खस्ताहाल सड़कों से,  समाज से अनुपस्थित होती जा रही न्याय व कानून व्यवस्था से चाहे कितना भी पीड़ित क्यों न हों, पर अपने परम्परागत त्योहारों को मनाने के लिये जैसे-तैसे कुछ न कुछ धन का जुगाड़ कर ही लेते हैं।   परम्परागत त्योहार ही क्यों, हम वेलेंटाइन डे जैसे नये – नये त्योहारों को भी खुशी-खुशी अंगीकार कर लेते हैं क्योंकि मिल जुल कर त्योहार मनाना हमारी सामाजिक विशेषता है।   यही कारण है कि दीवाली और होली, रक्षा बंधन और विजयादशमी की हम व्यग्रता से प्रतीक्षा करते हैं।

पर इस बार हमारे मुहल्ले में विष्णु मंदिर के पास होलिका दहन हेतु थोड़ी सी लकड़ियों में ही काम चला लिया गया तो मन को बहुत सुकून हुआ।   ऐसा सिर्फ हमारे मुहल्ले में ही नहीं, और भी अनेकानेक स्थानों पर हुआ है।  इसके लिये हम तहे-दिल से अपने सहारनपुर के नागरिकों को बधाई देना चाहेंगे।

DSC_0731यही नहीं, आज फाग वाले दिन भी गुलाल का इस्तेमाल अधिक दिखाई दिया, पानी का बहुत कम !  खास तौर पर छोटे बच्चे तो अपनी पिचकारी से लोगों पर फुहार छोड़ कर मन बहला रहे थे पर बड़ों को पानी से दूरी बरतते हुए ही देखा गया।

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