कला संगोष्ठी

आई.एम.ए. भवन में आयोजित कला-संगोष्ठी

आई.एम.ए. भवन में आयोजित कला-संगोष्ठी

सहारनपुर : 4 जून । क्या ललित कलायें बच्चों को एक बेहतर इंसान बनाती हैं? क्या वह बच्चों को एक बेहतर कैरियर भी प्रदान कर सकती हैं? क्या ललित कलाओं का मानव जीवन में अभिन्न स्थान होना चाहिये? सहारनपुर में आज आयोजित की गई कला संगोष्ठी इन मुद्दों पर विशिष्ट कलाकारों के विचार आमंत्रित करने के लिये आयोजित की गई थी जिसमें डा. विज्ञान व्रत (मुख्य अतिथि), डा. आर.पी. शुक्ल (अध्यक्षता), डा.एस.के. कुशवाहा, कुरुक्षेत्र वि. विद्यालय, डा. जगदीश वर्मा, मुज़फ्फरनगर, डा. राम विरंजन, डा. रश्मि शर्मा, डा. ममता सिंह, डा. महावीर सिंह, डा. डी.सी. अग्रवाल, डा. मधु जैन, डा. संतोष बिन्द आदि प्रख्यात् कलाकारों व कलाविदों को आमंत्रित करके एक सार्थक प्रयास किया गया कि कला की शिक्षा को एक जन-आन्दोलन का स्वरूप दिया जाये।

इस अवसर पर बोलते हुए डा. आर.पी. शुक्ल ने कहा कि आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में कार्य करें, उसमें निपुणता व विशिष्टता हासिल करने से ही सफलता और प्रसिद्धि हासिल होती है। कला तो मानव जीवन के जन्म से ही उसके साथ अभिन्न रूप से जुड़ जाती है। कला का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह एक पीढ़ी को पुरानी सारी पीढ़ियों से जोड़े रखती है। हम यदि अपने 5000 वर्ष पुराने पुरखों के बारे में जानते हैं तो यह सिर्फ कला के बलबूते ही संभव हो पा रहा है। केनवास पर, मिट्टी से, पत्थर पर आकृतियां उकेर कर हम अपने वर्तमान को स्थायित्व देते हैं, उसे अमर कर देते हैं। मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए डा. विज्ञान व्रत ने कहा कि यदि हमें बच्चों को संवेदनशील बनाना है तो ललित कलाओं के प्रति उनमें रुचि जाग्रत करने के लिये हमें प्रयास करने होंगे। डा. रामबली प्रजापति ने कला बाज़ार और कला के अर्थशास्त्र पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर बाहर से विशेष आमंत्रण पर पधारे सभी अतिथियों को शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया।

इससे पहले गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अरिमर्दन गौड़ ने इस कला-अभियान के महत्व एवं उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की पीढ़ी कला से दूर हो रही है, स्कूल कालेजों में कला विषय व कला संकाय धीरे – धीरे बन्द किये जा रहे हैं क्योंकि इन विषयों के लिये छात्र ही नहीं मिल रहे हैं। समाज में विषमता, कटुता, वैमनस्य बढ़ रहे हैं। कला को जीवन से दूर करने के ये दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में हमारा प्रयास है कि देश के लब्धप्रतिष्ठ कलाकारों को एक मंच पर लाकर इस मुद्दे पर न सिर्फ चर्चा कराई जाये बल्कि उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से बच्चों को प्रेरित किया जाये, उनको रोल मॉडल के रूप में बच्चों के सम्मुख प्रस्तुत किया जाये। इसके लिये 5 जून से 15 जून तक स्थानीय एस.डी. इंटर कालिज में कला की कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विशिष्ट कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन बच्चों के सम्मुख करेंगे ताकि बच्चे एक कलाकृति का निर्माण होता हुआ अपने सम्मुख देख सकें और उससे प्रेरणा ग्रहण कर सकें। इसके पश्चात्‌ दि. 16 जून को एस.डी. इंटर कालिज में ही कला प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा। 17 जून से 19 जून तक स्थानीय जनमंच में सद्यःनिर्मित वातानुकूलित कलादीर्घा में कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा।

कार्यक्रम का संचालन राकेश शर्मा ने किया।

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One thought on “कला संगोष्ठी

  1. कला का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह एक पीढ़ी को पुरानी सारी पीढ़ियों से जोड़े रखती है

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