मदर्स डे पर कार्यक्रमों की भरमार

mother-and-child  सहारनपुर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आजकल मदर्स डे के सुअवसर पर कार्यक्रमों की भरमार हो रही है।   इसी श्रंखला में डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, न्यू आवास विकास, जैन डिग्री कालेज रोड और डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, रसूलपुर बेहट रोड पर भी रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

सोनिया विहार स्थित डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम परंपरागत ढंग से गायत्री मंत्रोच्चार के साथ किया गया जिसमें विद्यालय की प्रधानाचार्या सुश्री मीनू भट्टाचार्य एवं इंचार्ज श्री कमल लूथरा सहित समस्त शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत में इति जैन और आस्था कंसल (कक्षा ६ और ७)  ने मां शीर्षक पर मनमोहक कविता प्रस्तुत की और कक्षा १० की शिखा वर्मा ने गीत प्रस्तुत किया।   इसके बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या द्वारा लिखित एकांकी “मां का हृदय” का मंचन किया गया जिसका निर्देशन स्वयं सुश्री मीनू भट्टाचार्या ने किया।   सलोनी पंवार, दीपक शर्मा, हरियश, मधुकर पाठक, आशू चौधरी, आदिल, शिखा वर्मा, दीक्षा और वंशिका ने सशक्त अभिनय से दर्शकों को बहुत प्रभावित किया।

डी ए वी विद्यालय के इंचार्ज कमल लूथरा ने मां शब्द की व्याख्या करते हुए जीवन में उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला।   प्रधानाचार्या ने कहा कि हम सभी को अपने मां-बाप का दिल से सम्मान करना चाहिये जो न केवल हमें अस्तित्व देते हैं वरन्‌ न जाने कितने कष्ट सह कर भी हमारा पालन-पोषण करते हैं,  अपने खर्चों में कटौती करके भी हमारी शिक्षा का प्रबन्ध करते हैं, हमें योग्य नागरिक बनाने में हमारी मदद करते हैं।

रसूलपुर स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में ग्रीटिंग कार्ड प्रतियोगिता / हिन्दी व अंग्रेज़ी में कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं  ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

’अ’  और ’ब’  दो वर्गों में विभाजित इस प्रतियोगिता में अंशुल, ऋषभ सैनी, प्रियंका गोयल, रिज़ा, दिया, अलबिशा, हिमांशी, वैष्णवी, ज़ीनत, खुशी शर्मा, आयुषी गर्ग, गोपाल, नन्दिता, महिमा, रिया चौधरी, हिमांशु, करुणा सैनी, दिव्या, आस्था और निष्ठा की कवितायें व ग्रीटिंग कार्ड बहुत सराहे गये।  “खुदा का करिश्मा है मां / मेरे दिल की आवाज़ है मां / दर्द बिन कहे पहचान लेती है मां / इस धरती पर भगवान है मां !  जैसी कवितायें बहुत प्रभावी रहीं।

विद्यालय की प्रभारी श्रीमती नीता मिगलानी ने कहा कि मां बच्चे की प्रथम शिक्षिका है, वह ही बच्चे को उंगली पकड़ कर चलना सिखाती है और बच्चे के सर्वांगीण विकास में सबसे प्रमुख भूमिका निभाती है।  जिस प्रकार मंदिर में भगवान की पूजा की जाती है, उसी प्रकार घर में, बच्चों को उनको महत्वपूर्ण भूमिका के लिये भगवान की तरह पूजनीय मानना चाहिये।

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