मदर टेरेसा कालिज ने मनाया नाइटिंगेल के जन्म दिन

सहारनपुर – १२ मई ।  नर्सिंग जैसे सेवाभावी व्यवसाय की शिरोमणि मानी जाने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म दिन प्रति वर्ष नर्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है।  हाथ में प्रकाश लिये मरीज़ों की सेवा करती हुई फ्लोरेंस नाइटिंगेल की छवि किसी भी मरीज़ के हृदय में आशा का संचार कर देने के लिये काफी है। सेवा की साक्षात्‌ प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म दिन मदर टेरेसा नर्सिंग स्कूल व हॉस्पिटल में भी यदि नहीं मनाया जायेगा तो और कहां मनाया जायेगा?

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के अध्यक्ष डा. एस. एस. राणा, पलक राणा, शशि राव, निर्मल व श्रीमती अनूप कुमारी ने मां सरस्वती और मिस फ्लोरेंस नाइटिंगेल की प्रतिमा के समक्ष संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया।   इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।  जहां सरस्वती वन्दना प्रस्तुत करते हुए विशाखा ने कार्यक्रम को आरंभ किया, वहीं मेघा, ललिता, सोनम ने पंजाबी गाने पर समूह नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को एक नया मोड़ दिया।  बबीता रानी ने अठ्ठरा बरस की गाने पर धमाल मचाया तो रूबी कमाल और गौरव कुमार ने ज़ूबी – ज़ूबी गाने पर सबको झूमने पर विवश कर दिया।  ’डांस पे चांस मार ले’ गाने पर नृत्य करके दिव्या शर्मा ने सब की वाहवाही लूटी।

नृत्य संगीत के दौर के बाद कार्यक्रम को गंभीरता प्रदान करते हुए डा. एस. एस. राणा ने फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जीवन चरित्र का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म इटली के एक धनाढ्य परिवार में १२ मई १८२० को हुआ था और १७ वर्ष की आयु तक पहुंचते पहुंचते उन्होंने अनुभव कर लिया था कि उनके जीवन का सर्वप्रमुख उद्देश्य मरीज़ों की सेवा करना ही है।  उन्होंने नर्सिंग स्कूल की भी स्थापना की।

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